एक झलक डा. रुपेश जी की याद मे…
मेरे मामा का म्रत शरीर ; कितना उदासीन था वह पल गम्भीर | हर आख मे थी उस वक्त नमी ; कुछ ऐसी महसूस हई उनकी कमी | हर ज़ज्बात निकला उस पल मेरी मां कि आंखो से | एक मुसाफ़िर कम हो गया जैसी अपनी राहो से | मेरे मामा का म्रत शरीर कितना [...]